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Channel: सफर - राजीव रंजन प्रसाद
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बंगाल में हुए नक्सली हमले पर खामोश मीडिया, मानवादिकारवादी और लेखक...

कोई आश्चर्य नहीं कि चौबीस घंटे भी नहीं बीते और पश्चिम बंगाल में नक्सली हमले की खबर मीडिया के सर से सींग की तरह गायब हो गयी। देश और दुनियाँ में बहुत सी खबरे हैं जिसके लिये हमारे देसी जेम्स बॉंड जुटे हुए...

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नक्सलवादी, आतंकवादी और भगत सिंह

कुहु बिटिया अब हाथी-घोडे की कहानियों से आगे आ गयी है, क्यों न हो वह अब कक्षा दूसरी में जो जाने वाली है। आज मैंने भगत सिंह से उसका परिचय कराया। “बेटा भगत सिंह नें संसद के भीतर बम और आजादी के पर्चे...

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माओवादियों का “सीजफायर” और दिनकर की “शक्ति और क्षमा”

रात जब संचार माध्यमों नें चीखना आरंभ किया कि माओवादियों नें बहत्तर दिनों के सीजफायर का एलान किया है तो जिज्ञासा इस बात की थी कि उनकी शर्ते क्या हैं? हम महान देश के वासी हैं, हमसे आतंकवादी भी अपनी...

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घने जंगल में खूबसूरत फूल: चंद्रू [एक संस्मरण, बस्तर के जंगलों से] – राजीव...

बात कोई तेरह -चौदह वर्ष पुरानी है। उस रात जब केवल मेरे कमरे में आया तो उसके चेहरे में एक चमक थी। पत्रकारों को किसी नई कहानी के मिलने का एसा ही सुकून होता है जैसा ताजी कविता लिखी जाने के बाद पहले श्रोता...

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अच्छा तो तुम वामपंथी नहीं हो? यानी कि दक्षिण पंथी हो? - राजीव रंजन प्रसाद

इस बात को साल भर से अधिक हो गया। मैंने बस्तर में जारी नक्सलवाद के खिलाफ किसी लेख में टिप्पणी की थी। उस दिन मेरे नाम को इंगित करते हुए एक पोस्ट “मोहल्ला” ब्लॉग पर डाली जिसका शीर्षक था – “बस्तर के हो तो...

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विरोध व्यवस्था का अथवा बस्तर का?

जनपक्षधरता हमेशा व्यवस्था में सुधार अथवा बदलाव की दिशा में इंगित होती है। आप संवेदनशील व्यक्ति हैं तो निश्चित रूप से आपको अपने परिवेश के इर्द-गिर्द की घटनायें कुरेदेंगी, झकझोरेंगी तथा उद्वेलित भी...

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बस्तर का एक एसा नायक जिसे किसी नें कभी याद नहीं किया

[प्रफुल्ल चन्द्र भंजदेव (1908 – 1960)]एक किताब के बारे में जानकारी मिली जिसका शीर्षक है - Financial Position of Govt. of India (How decay has set in); लेखक थे प्रफुल्ल चंद्र भंजदेव। बहुत तलाश किया...

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देवी शक्तियों का बस्तर

व्यवस्था में बदलाव वस्तुत: एक पूरी संस्कृति का पटाक्षेप भी है। बस्तर के संदर्भ में मुख्यत: दो कालखण्ड मायने रखते हैं जब इस तरह के बदलाव देखे गये। पहला समय था जब नाग राजाओं (760-1324 ई) की पराजय हुई तथा...

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पाटलीपुत्र के पुरावशेषों से बस्तर की तलाश!! [यात्रा वृतांत, भाग - 1]

कुछ दिनों का अवकाश। अभी कुछ दिन पटना मे हूँ। एक छोटा सा शोध विषय ले कर आया हूँ - एक समय के समृद्ध शासकों का दौर और तत्कालीन बस्तर से उनके राजनीतिक सम्बन्ध पर हो सकता है कोई सूत्र, कोई संदर्भ या कोई एसी...

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यह मुलाकात एक अविस्मरणीय संस्मरण बन गयी। [यात्रा वृतांत, भाग - 2]

सुबह सुबह रिम झिम बरसती बरखा नें एक बार कार्यक्रम पर पुनर्विचार करने की स्थिति ला दी थी। साथी अनुज जी के साथ उनकी बाईक पर ही निकल पडा। पटना शहर से लगभग सौ किलोमीटर से कुछ अधिक की दूरी पर अवस्थित हैं...

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बस्तर में प्रगतिशील समाज एक दृष्टिकोण

तूम्बा बस्तर में हर किसी कंधे पर शान से विराजमान हुआ करता था। विषय में उतरने से पहले तूम्बे को केन्द्र में रख कर विमर्श करते हैं। लौकी के जो फल बुढ़ा जाते हैं उसको तोडकर उसका शीर्ष भाग काट लिया जाता...

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भगवान पुस्तकालय के संरक्षण की दृष्टि से जिला प्रशासन को लिखा गया पत्र।

भागलपुर स्थित भगवान पुस्तकालय स्थानीय नहीं अपितु राष्ट्रीय धरोहर है। यह पत्र पुस्तकालय की स्थिति भी स्पष्ट करता है तथा इसके संरक्षण के लिये भागलपुर जिला प्रशासन से एक अपील भी है। अपेक्षा करता हूँ कि...

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बस्तर मे जीवित पुरापाषाणकाल और कातिल विचारधारायें।

बस्तर क्षेत्र के इतिहास की विवेचना हम बस्तर क्षेत्र के इतिहास की विवेचना हम अत्यधिक सतही प्रमाणों के आधार पर कर पाते हैं। संभवत: हमारे युग को ज्ञान की लालसा ही नहीं रही और हमारी पीढी केवल उन विषयों के...

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प्राचीन बस्तर - रामायणकालीन दण्डकारण्य का इतिहास [1]

सान्ध्य दैनिक - ट्रू सोल्जर में प्रकशित दिनांक 26.07.2012रामायण को ले कर प्रगतिशील कहे जाने वाले समाज के अपने पूर्वाग्रह हैं तथा उसके बीच अंतर्निहित अतीत की ओर कोई शोध भरी दृष्टि से देखने का जोखिम नहीं...

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हृषिकेश सुलभ जी नें दुर्लभ तस्वीरों का खजाना हममें बाँट दिया..

हृषिकेश सुलभ जी से मुलाकात और यादें बस्तर की...।------------------------------------------------------हृषिकेश जी को यत्र तत्र पढने का मौका मिला है तथा नाटक में रुचि हेने के कारण उनकी इस क्षेत्र में...

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बस्तर के भौगोलिक परिवेश पर विमर्श - रामायण काल से वर्तमान तक

सांध्य दैनिक ट्रू सोल्जर में दिनांक 3.08.2012 को प्रकाशितमैं इन्द्रवती नदी के बूँद-बूँद को, अपने दृगजल की भाँति जानता आया हूँ। --------------प्राचीन बस्तर अथवा दण्डकारण्य के समाजशास्त्रीय विश्लेषण की...

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दुर्भाग्य!! बस्तर से यह विरासत मिट जायेगी {प्राचीन बस्तर का समाजशास्त्र...

सांध्य दैनिक ट्रू-सोल्जर (रायपुर) से दिनांक 7.08.2012 को प्रकाशितबस्तर पर जानकारी एकत्रीकरण के लिये आर्य-द्रविड अंतर्सम्बन्धों को बारीकी से समझना आवश्यक है। वस्तुत: हमारे पूर्वाग्रह गहरे हैं तथा हम...

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बस्तर, प्राचीन स्त्रीराज्य की विरासत है – संदर्भ: महाभारत काल

सान्ध्य दैनिक ट्रू सोल्जर में दिनांक 23.08.2012 को प्रकाशित स्त्री नें हमेशा बराबरी और सम्मान की लडाई लडी है। भारत भर में एसे उदाहरण कम ही देखने को मिले हैं जहाँ उसने यह अधिकार पाया है। इस आधी आबादी के...

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नेताजी सुभाष के साथी क्रांतिकारी मोहन लहरी पंचतत्व में विलीन [संस्मरण तथा...

दैनिक छत्तीसगढ (रायपुर) में प्रकाशित संस्मरण दैनिक छत्तीसगढ - दिनांक 30 अगस्त 2012 (पृष्ठ - 8)पृष्ठ 8 से आगे---- दैनिक छत्तीसगढ - दिनांक 30 अगस्त 2012 (पृष्ठ - 11)सान्ध्य दैनिक - ट्रू सोल्जर (रायपुर)...

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राजेन्द्र यादव के हंस-महल में बस्तर के युवा कहानीकार तरुण भटनागर की सेंधमारी

राजेन्द्र यादव के उस दुस्साहस की सराहना अवश्य करूंगा जहाँ उन्होंने युवा कथाकार तरुण भटनागर के साथ हुए अपने संवादों के पत्र ‘हंस के सितम्बर-2012 अंक’ का सम्पादकीय बना कर प्रस्तुत किये हैं। राजेन्द्र...

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